अल्फ़ाज़-ए-नज़्म
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चुनिंदा
विशेष शायरी
चाँद जो सहेजता है
चाँद ने सहेजे हैं वो हर राज़ जिन्हें ज़ुबाँ पर लाने से मैं डरता रहा।
रचनाकार: Sana Malik
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Ummeed Ka Diya
रचनाकार: Ahmed Rizvi
712 2.8k
Bahaar Ka Wada
रचनाकार: Sana Malik
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विशेष एल्बम
चाँद ने सहेजे हैं वो हर राज़ जिन्हें ज़ुबाँ पर लाने से मैं डरता रहा।
— Sana Malik